Wednesday, 13 June 2012
सेक्स एजुकेशन जरूरी हाल ही ई मेंमें मुंब 15 वर्ष की स्कूल छात्रा ने प्रेग्नेंट होने के बाद बच्चे को जन्म देने का फैसला किया | इससे एक बार फिर से हमारे देश में बहस छिड़ गयी है कि टीनएज में नवजात शिशु को जन्म देना कितना उचित है | वैसे तो इस तरह के केसेस अक्सर हमे विदेशो में देखने को मिलते है | इतना ही नहीं वहा तो स्कूल के नजदीक ही जच्चा बच्चा केंद्र भी स्थापित होते है | लेकिन पश्चिम से चली ये हवा अब हमारे देश में भी बहने लगी है आज समाज में नेतिक मूल्यों के पतन का सबसे बड़ा कारण भी पश्चिमी सभ्यता कि देन है | लेकिन जरा सोचिये आज मुंबई की इस युवती ने समाज की सारी बंदिशों को तोड़ के जो फैसला किया है उसे हमारा समाज किस हद तक स्वीकार कर पायेगा? हिंदी सिनेमा में भी शादी से पहले प्रेग्नेंट होने की अवस्था को पर्दे पर बखूबी दिखया गया है किस तरह से एक लड़की अपने पूरे परिवार , समाज से लड़ कर बच्चे को जन्म देती है | लेकिन अक्सर हम पर्दे पर वही देखते हैं जो सच्चाई से सों कोस दूर होता है| समाज संस्कारो रिति रिवाजों पर चलता है इसके बिना इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है | लेकिन आज का समय बिलकुल बदल चूका है एक नई सोच लेकर हमारा भारत आगे बड़ रहा है बेहतर यही होगा की आज की पीड़ी को हर स्तर पर जागरूक बनाये | वैसे देखा जाये तो आज जीवन के हर पहलू पर खुलकर चर्चा की जाती है राजनीति हो या समाज की मुख्य समस्या हर स्तर पर हम अपने अनपे तर्क रखते है और समस्यों का समाधान भी खोजते है | लेकिन सेक्स शब्द सुनते ही हमारे मास्तिक्ष में कामोइच्हा के बिम्ब बन्ने लगते है उस पर कोई भी बात करना ही नहीं चाहता है | जबकि हम अच्छी तरह से वाकिफ है की सेक्स जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा है , इस तरह के केसेस बढने की सबसे बड़ी वजह है की आज भी सेक्स को टेबू माना जाता है
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