दिल्ली पुलिस बदले अपनी छवि. .
ग़ालिब का शहर दिल्ली आज भी इसकी खुशबु दूर दराज के परदेसियो को अपनी और खींच लेती है | शहर की वो तंग गलिया और दिल्लीवालो की बेबाक बोलने की अदा आज भी बरक़रार है |
वक़्त के साथ- साथ शहर ने भी करवट ली और विकास की दौड़ में शामिल हुआ | राजधानी ने ज़मीनी स्तर पर अनेक परिवर्तन किये चाहे वो शानदार पुलों का निर्माण या फिर बहुमंजिले ईमारत एवं मेट्रो ने तो शहर की काया पलट कर धर दी | दिल्ली सरकार विकास की कसौटी पर सो फीसदी खरी उतरती है, लेकिन सुरक्षा की बागडोर सरकार ने ऐसे कंधो पर डाल दी है जिससे शहर की आमजनता बात करते हुए भी घबराती है | दिल्ली पुलिस आज शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात है और सुरक्षा की गारंटी देने का वादा करती है| लेकिन सिर्फ पुलिस की वर्दी पहन लेने से ये सिद्ध नहीं होता आज हमारे बीच पुलिस की छवि इतनी ख़राब हो चुकी है की हम किसी वर्दीवाले से बात करना भी पसंद नहीं करते है | इसकी सबसे बड़ी वजह पुलिस का अड़ियल रवैया है जो नागरिको को अपनी वर्दी का रोब दिखाकर आमजन की बोलती बंद कर देता है | शहर इन लोगो को कानून का दलाल , भड़वा न जाने कितने अनाप शनाप नामो से पुकारता है | ये सब सुन कर पुलिस को तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कानून की तोहीन बराबर होती है | पुलिस का ये खौफ अपराधियों के मन से तो निकलता जा रहा है और गुनेहगार निडर हो कर पुलिस की नाक के नीचे अपराध करते है | और अगर गलती से कोई चोर उचक्का पकड़ में आ जाता है तो अगले दिन चंद रुपए दे कर बहार आ जाता है और फिर से अपने धंदे में लग जाता है | पुलिस अपनी छवि से विपरीत दिशा में काम कर रही है , शहर की जनता से फ्रेंकली रवैया अपनाने से ही अपराध पर काबू पाया जा सकता है |
( अमित आद्वंशी )
( अमित आद्वंशी )