एक सन्देश आवाम के नाम ....
समस्त आवाम को मैं अमित आद्वंशी ..अपने शब्दों के माध्यम से एक सन्देश देना चाहता हू | आज हम भारत के नागरिक होने के नाते सभी जिम्मेदारियों को बखूबी से निभाते है |
जीवन के सभी पहलुओ से हो कर गुजरते है..और हम इस दौरान विभिन्न अनुभवों का अध्यन भी करते है | सच कहू तो हमारा सम्पूर्ण जीवन जीविका उपार्जन में बीत जाता है |
जीवन के अर्थ को समझने में हमारी तमाम कोशिशे नाकाम हो जाती है | आखिर हमारी पहचान क्या है ? हमे इस दुनिया में क्यों धर्म जाती के आधार पर आपस में बाटा गया है ?
क्या सिर्फ एक मानव होना ही काफी नहीं था ..जो हमे तरह तरह के नामो से पुकारा जाने लगा वास्तव में बचपन से मैं इन सवालों के जवाब तलाश रहा हू | लेकिन जब कोई इंसान इन सवालो
के जवाब जानने की कोशिश करता है तो उसे रूदिवादिता की चादर उड़ा कर सुला दिया जाता है | बड़े बड़े रिशिमुनियो ने भी भ्रम वाला जाल लोगो के सिरों पर बांध रखा है वास्तव में सत्य क्या
है ? क्यों मानव की उत्पत्ति इस दुनिया में हुई .आखिर वो कौनसा कारण था जिसके लिए परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना की |
आज हमारी सोच को संकुचित बनाने वाला सबसे बड़ा वर्ग
पंडित ब्रह्मण तथा रिशिमुनी है जिन्होंने हमारे समाज को अंधविश्वास की खाई में धकेल दिया है और इस पूरी मानव जाती को अनेक जातियों में बाट दिया है | अंधविश्वास एवं जात - पात को वा देने वाले ये लोग समाज के लिए आज भी घातक बने हुए है | लेकिन आज हमारे लिए सबसे दुर्भाग्य की बात ये है की आज का शिक्षित समाज भी इन जात -पात के बन्धनों में बंधा हुआ है |
जाती - प्रथा की जड़ो को पानी देने वाले ये लोग आज भी आग में घी डालने का काम लगातार कर रहे है लेकिन इस तरह की मानसिकता का समर्थन करने वाले लोग भी हम तुम में से ही है |
अब समय आ गया है की वो इस घटिया एवं कुंठित मानसिकता की जड़ को उखाड़ कर अपने भीतर सम्पूर्ण मानव जाती के प्रति प्रेम की जोत जलाये और देश को एक बंधन में पिरोये .....
( अमित आद्वंशी )
समस्त आवाम को मैं अमित आद्वंशी ..अपने शब्दों के माध्यम से एक सन्देश देना चाहता हू | आज हम भारत के नागरिक होने के नाते सभी जिम्मेदारियों को बखूबी से निभाते है |
जीवन के सभी पहलुओ से हो कर गुजरते है..और हम इस दौरान विभिन्न अनुभवों का अध्यन भी करते है | सच कहू तो हमारा सम्पूर्ण जीवन जीविका उपार्जन में बीत जाता है |
जीवन के अर्थ को समझने में हमारी तमाम कोशिशे नाकाम हो जाती है | आखिर हमारी पहचान क्या है ? हमे इस दुनिया में क्यों धर्म जाती के आधार पर आपस में बाटा गया है ?
क्या सिर्फ एक मानव होना ही काफी नहीं था ..जो हमे तरह तरह के नामो से पुकारा जाने लगा वास्तव में बचपन से मैं इन सवालों के जवाब तलाश रहा हू | लेकिन जब कोई इंसान इन सवालो
के जवाब जानने की कोशिश करता है तो उसे रूदिवादिता की चादर उड़ा कर सुला दिया जाता है | बड़े बड़े रिशिमुनियो ने भी भ्रम वाला जाल लोगो के सिरों पर बांध रखा है वास्तव में सत्य क्या
है ? क्यों मानव की उत्पत्ति इस दुनिया में हुई .आखिर वो कौनसा कारण था जिसके लिए परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना की |
आज हमारी सोच को संकुचित बनाने वाला सबसे बड़ा वर्ग
पंडित ब्रह्मण तथा रिशिमुनी है जिन्होंने हमारे समाज को अंधविश्वास की खाई में धकेल दिया है और इस पूरी मानव जाती को अनेक जातियों में बाट दिया है | अंधविश्वास एवं जात - पात को वा देने वाले ये लोग समाज के लिए आज भी घातक बने हुए है | लेकिन आज हमारे लिए सबसे दुर्भाग्य की बात ये है की आज का शिक्षित समाज भी इन जात -पात के बन्धनों में बंधा हुआ है |
जाती - प्रथा की जड़ो को पानी देने वाले ये लोग आज भी आग में घी डालने का काम लगातार कर रहे है लेकिन इस तरह की मानसिकता का समर्थन करने वाले लोग भी हम तुम में से ही है |
अब समय आ गया है की वो इस घटिया एवं कुंठित मानसिकता की जड़ को उखाड़ कर अपने भीतर सम्पूर्ण मानव जाती के प्रति प्रेम की जोत जलाये और देश को एक बंधन में पिरोये .....
( अमित आद्वंशी )
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