जाती छोड़ो आन्दोलन जरुरी...
इतिहास के इस असाधारण वैज्ञानिक युग में आज भी हमारा समाज बटा हुआ है , सर नेम कही न कही यह भी समाज को अनेक जातियों के खांचे में खड़ा करते है निश्चित ही सर नेम जातिप्रथा
के प्रतिक है | सामजिक एवं राष्ट्रीय एकता के लिए यदि हमे जातिवाद से ऊपर उठना है तो हमे सर नेमो के बन्धनों से ऊपर उठना होगा तभी समाज में बराबरी आयेगी | भारत धर्म प्रधान देश है,
यहाँ अध्यात्मिक उपलब्धियों पर गर्व किया जा सकता है | परन्तु विभिन्न धर्म विभिन्न मजहब एवं विभिन्न जातिया अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए होती है | इसी विभिन्नता के कारण मानव
की धार्मिक वे सामाजिक एकता टूट गयी है | इस बात से हम भली भाति से परिचित है की सबका सृजनकर्ता एक ही है , सब एक ही नूर से उपजे है , किन्तु जिस सृष्टिकर्ता ने यह सृष्टि ,अन्तरिक्ष , आकाश , निर्मित किये है उसे भिन्न भिन्न नामो से पुकार कर हमने अनेक झगडे उत्पन्न करके आदमी की मूल पहचान बिगाड़ दी है | यह मामला इतना बिगड़ चुका है की शायद ही ठीक हो पाए ,
जब तक हम प्रेम रस का प्याला भर के लोगो तक नहीं पहुचाते तब तक हमारी आत्मा से यह जातिवाद का कीड़ा नष्ट होने वाला नहीं है | प्रेम ही लोगो को इसके अभिशाप से मुक्त करवा सकता है | क्यूंकि प्रेमरस में डूबने के बाद भेद-भाव जात - पात , उच्च -नीच नहीं करता है फिर उसे रंग रूप नहीं दिखता है , उसे तो केवल आत्मा नज़र आती है | समदृष्टि रखने वाला ऐसा सक्ष धर्म की सीमा
से बहार निकल कर प्रेम की ज्योति में रम जाता है | ऐसे लोगो को चीटी- हाथी , कुत्ता -बिल्ली, सब में एक ही इश्वर दिखाई देता है फिर वे सबको समां दृष्टि से देखता है | यही वास्तविक रूहानी
अध्यात्म कहलाता है , सभी धर्मो का सार यही अध्यात्म है यही जाती छोड़ो आन्दोलन का प्रमुख विषेय है |
इतिहास के इस असाधारण वैज्ञानिक युग में आज भी हमारा समाज बटा हुआ है , सर नेम कही न कही यह भी समाज को अनेक जातियों के खांचे में खड़ा करते है निश्चित ही सर नेम जातिप्रथा
के प्रतिक है | सामजिक एवं राष्ट्रीय एकता के लिए यदि हमे जातिवाद से ऊपर उठना है तो हमे सर नेमो के बन्धनों से ऊपर उठना होगा तभी समाज में बराबरी आयेगी | भारत धर्म प्रधान देश है,
यहाँ अध्यात्मिक उपलब्धियों पर गर्व किया जा सकता है | परन्तु विभिन्न धर्म विभिन्न मजहब एवं विभिन्न जातिया अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए होती है | इसी विभिन्नता के कारण मानव
की धार्मिक वे सामाजिक एकता टूट गयी है | इस बात से हम भली भाति से परिचित है की सबका सृजनकर्ता एक ही है , सब एक ही नूर से उपजे है , किन्तु जिस सृष्टिकर्ता ने यह सृष्टि ,अन्तरिक्ष , आकाश , निर्मित किये है उसे भिन्न भिन्न नामो से पुकार कर हमने अनेक झगडे उत्पन्न करके आदमी की मूल पहचान बिगाड़ दी है | यह मामला इतना बिगड़ चुका है की शायद ही ठीक हो पाए ,
जब तक हम प्रेम रस का प्याला भर के लोगो तक नहीं पहुचाते तब तक हमारी आत्मा से यह जातिवाद का कीड़ा नष्ट होने वाला नहीं है | प्रेम ही लोगो को इसके अभिशाप से मुक्त करवा सकता है | क्यूंकि प्रेमरस में डूबने के बाद भेद-भाव जात - पात , उच्च -नीच नहीं करता है फिर उसे रंग रूप नहीं दिखता है , उसे तो केवल आत्मा नज़र आती है | समदृष्टि रखने वाला ऐसा सक्ष धर्म की सीमा
से बहार निकल कर प्रेम की ज्योति में रम जाता है | ऐसे लोगो को चीटी- हाथी , कुत्ता -बिल्ली, सब में एक ही इश्वर दिखाई देता है फिर वे सबको समां दृष्टि से देखता है | यही वास्तविक रूहानी
अध्यात्म कहलाता है , सभी धर्मो का सार यही अध्यात्म है यही जाती छोड़ो आन्दोलन का प्रमुख विषेय है |
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