Friday, 16 December 2011

                                                                           आखिर ये बेशर्मी मोर्चा क्यों ?
हमारे देश में इन दिनों सभी लोग बेशर्मी मोर्चे पर अपनी अपनी प्रतिक्रया दे रहे है | टोरंटो से शुरू हुई इस मुहिम ने हमारे लोगो को भी सोचने पर मजबूर 
किया है | हम लोकतांत्रिक देश का हिस्सा है और हमे पूरा आधिकार है अपने विचारो को जनता के समक्ष रखने का | लेकिन हम हमेशा विदेशी विचारधाराओ
अपनाने के लिए क्यों तैयार रहते है ? कभी कुछ नया करने का प्रयास क्यों नहीं करते , अगर नज़र डाले तो हमारे आस पास की तमाम चीजे विदेशी मानसिकता
देन है | इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश में बुधिजीवियो की संख्या अपार है लेकिन आश्चार्य जब होता है जब ये लोग भी भीड़ का हिस्सा बन कर विदेशी
मानसिकता की भेट चढ़ जाते है | और अंधी दौड़ में शामिल हो जाते है | मैं स्ल्ट शब्द के बिलकुल खिलाफ नहीं हू अगर महिलायों को लगता है  कि स्ल्ट वाक से
वे अपने आप को शहर में सुरक्षित महसूस करेगी तो उन्हें ऐसा जरुर करना चाहिए | लेकिन जरा सोचिये जिस देश में प्रतिदिन बलात्कार कि घटनाओ का ग्राफ
निरंतर बढता जा रहा हो , वहा एक दिन के अभियान से क्या कोई फर्क पड़ेगा ?

 वास्तव में दिल्ली पुलिस चोकसी बड़ाने समर्थ न हो लेकिन महिलायों को भी
अपनी तरफ से थोडा सा अलर्ट रहना चाहिए | कुछ महिनो पूर्व दिल्ली के कमिश्नर बी .के गुप्ता ने कहा था कि आधी रात में महिलायों को सड़क पर निकलना लाज़मी नहीं
है | लेकिन इस बयांन के तुरंत बाद ही वे विवादों से घिर गए , लेकिन मैं पूछता हू क्या गलत  कहा उन्होंने हमारे देश में स्वंतंत्रता का अधिकार सभी को प्राप्त है| लेकिन अगर
आप इसके अर्थ को न समझते हुए अतार्किक  तर्क देना वाजिब नहीं है | इस बात को हम भली भाति  समझते है कि दिल्ली पुलिस हर पल महिलायों पर नज़र नहीं रख सकती है |
बेहतर है कि महिलाये ऐसी परिस्थिति में पुलिस कि मदद करे एवं अपने आप को जागरूक बनाये | अक्सर सुनने में आता है कि अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को महिलाये छुपा
लेती है , पुलिस स्टेशन जाना तो दूर अपने घर के सदस्यों को भी कुछ नहीं बताती है | लेकिन मीडिया जिस तरह से पिछले कुछ वर्षो से ज्यादा सक्रिय रहा है उसने लोगो को सच से रूबरू और अधिक जागरूक बना दिया है| 
            मैं दिल्ली विश्वविधालय कि छात्र उमंग सबरवाल कि प्रशंसा करता हू कि इस मुहिम के माध्यम से महिलायों को एक जुट
होने का मौका दिया लेकिन वो इसके साथ महिलायों को पुलिस प्रशासनिक जानकारी एवं साहसी बन्ने को प्रेरित करती तो ज्यादा बेहतर होता |                (अमित आद्वंशी)

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