मीडिया बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए
तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती नज़ारे हम क्या देखे ....हिंदी फिल्म का ये गीत मीडिया की वर्तमान स्थिति पर फिट बैठता है |
अगर आज हमारे मुल्क में सबसे ज्यादा कोई शक्तिशाली है तो वो है मीडिया | बड़े से बड़े नेता अभिनेता के चेहरे पर
मीडिया का खोफ़ साफ़ नज़र आता है | समाज के हर पहलु पर मीडिया की पैनी नज़र रहती है . लेकिन मीडिया सिर्फ उन
खबरों को ज्यादा तवज्जो देता है जो मास के सामने राजनितिक मूल्यों से सरोकार रखती है |चाहे वो बड़बोले दिग्विजय सिंह
के बयान हो या राहुल गाँधी का उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रचार करना हो , हर खबर टी.वी चैनेलो पर छाई रहती है | हमारे टी.वी
एंकर पुरे दिन एक ही खबर पर खेलते रहते है | कुछ ऐसी स्थिति ही प्रिंट की भी है अखबारों के फ्रंट पेज पर राजनितिक खबरों
को ही प्राकशित किया जाता है | और हमारे मुल्क की जनता इन खबरों पर अपनी भड़ास कुछ इस तरह से निकालती है ... सब
नेता चोर है साले ... इस देश का कुछ नहीं हो सकता .. वास्तव में यही कटु सत्य है | आम जनता के दिल से नेताओ के लिए
यही शब्द निकलते है , पर अफ़सोस न तो इससे जनता को कोई फर्क पड़ता है और न ही मीडिया को | लेकिन मीडिया उन
खबरों पर प्रकाश सिर्फ तिनके भर ही डालता जो देश की लाचारी , दलिद्रता , गरीबी , अत्याचार जात - पात को दर्शाती है |
लेकिन इस सच्चई से मुह नहीं मोड़ा जा सकता की देश के कुछ हिस्सों में आज भी लोग एक दीपक के सहारे ही अपनी रात
काट देते है | मगर मीडिया तो इनसे कोसो दूर शहर के चाट भंडारों को दिखाने में मशगूल है . मीडिया आज राजनितिक
पार्टियों की भेट चढ़ चुकी है | हमारे राजनेताओ को तो सबकुछ मुहैया हो रहा ही लेकिन जिन लोगो को पेट भरने की लिए
एक वक़्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही उन पर नज़र कौन रखेगा ?
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