नैतिकता जरुरी
मैं भी अन्ना तू भी अन्ना अब तो सारा देश अन्ना ,,,,,,,,,,, देश की अवाम ने इस नारे को इतना बुलंद किया की सत्ता पर काबिज़ हुई सरकार के होश उड़ गए | राजघाट से आरंभ हुई अन्नागिरी को भारी जन समर्थन मिला , लाखो की तादाद में बच्चे बुड़े एवं महिलायों ने भी इस आन्दोलन को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी |इससे पहले भी हमारे देश में जमीन से जुड़े मुद्दों पर आन्दोलन हुए है लेकिन इतने बड़े स्तर पर इस तरह का आन्दोलन हमने पहली बार देखा जिसने पूरे देश की जनता को एक साथ ला कर खड़ा कर दिया | लेकिन अन्ना इफ्फेक्ट इतने व्यापक स्तर पर होगा इसकी किसी ने भी कल्पना भी नहीं की थी | जो लोग आन्दोलन का हिस्सा किसी वजह से नहीं बने थे उन्होंने अपने घर बैठे बैठे ही पल पल की जानकारी मीडिया एवं सोशल नेटवर्किंग साईट से प्राप्त की | इस बीच लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली मीडिया ने बखूबी से अपना काम किया तथा अन्नागिरी को जनता तक पहुचाने में एक अहम भूमिका अदा की | पहले ही आमजन की कमर मेहेंगी चीजों ने तोड़ दी थी इस दौरान सरकार को आड़े हाथो लेने का अच्छा मौका था और देश की जनता उसे खोना नहीं चहाती थी | लोकपाल बिल के समर्थन में देखते ही देखते अभिनेता से लेकर नेता हर सक्श खुल कर अपनी बात रख रहा था | रामलीला मैदान में जो जन सैलाब हमे देखने को मिला उसमे सबसे महतवपूर्ण बात ये थी को इसमें महिलायों की संख्या भी उतनी थी जितनी पुरुष की संख्या | सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश अपनी चरम सीमा पर था ये हम सबने देखा, लेकिन जन्लोक्पाल बिल को पास करवाने में रामलीला मैदान के मंच का प्रयोग अभद्र भाषा के साथ नेताओ के खिलाफ भी किया जा रहा था शायद मीडिया को छोड़ कर वहा किसी आम जन ध्यान गया ही नहीं , मैं पूछना चाहता हू जो नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आवाज़ उठा रहे है तो फिर इस तरह की शब्दावली को प्रयोग क्यों जनाब ? सबसे पहले तो आपको अपना आचरण ही साफ़ रखना है ना | जरा सोचिये जहा इतने बड़े बड़े नेताओ का आचरण ही ऐसा है तो आमजन से हम भ्रष्टाचार को समाप्त करने की कितनी उम्मीद कर सकते है | जिस देश में हर छोटे छोटे विभाग की नीव ही भ्रष्टाचार से पड़ी हो वहा हम सिर्फ एक बिल के पास करवा लेने से क्या हासिल कर लेंगे | इस सवाल की तरफ किसी का धयान ही नहीं गया क्या इसके बाद भ्रष्टाचार हमारे देश से चला जायेगा ? जब तक हम अपने भीतर छुपे एहंकार और भ्रष्ट आचरण को नहीं मार देंगे तब तक देश को हम इससे मुक्त नहीं करा सकते | शुरुआत हमे खुद से करने की जरुरत हैं लेकिन जिस जन्लोक्पाल बिल को लेकर बीते कुछ दिन पूर्व हाय तौबा हो रही थी वहा नैतिकता का कही भी जिक्र नहीं था | अमित आद्वंशी
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