सेक्स एजुकेशन जरुरी
हाल ही में मुंबई की 15 वर्षीय स्कूल की छात्रा ने प्रेग्नेंट होने के बाद बच्चे को जन्म देने का फैसला किया है | इस केस ने एक बार फिर से देश में चर्चाओ का माहोल गरम बना दिया है |
आखिर टीनएज में प्रेग्नेंट होना कितना उचित है ? इस तरह की घटनाये अक्सर हमे विदेशो में देखनो को मिलती थी| इतना ही नहीं वहा तो प्रत्येक स्कूल एवं कॉलेज के साथ ही जच्चा
बच्चा केंद्र भी स्थापित होते है | पश्चिम से बहने वाली इस हवा न देश की सीमायों में कब प्रवेश किया किसी को पता ही नहीं चला , नेतिकता के पतन का सबसे बड़ा कारण भी हमारे
देश में पश्चिमी जीवन शेली की ही देंन है | हिंदी सनेमा में भी शादी से पहले प्रेग्नेंट होने की अवस्था को बखूबी से परदे पर फिल्माया गया है लेकिन हमे वही दिखाया जाता है जो सच से
बहुत दूर होता है किस तरह लड़की अपने बच्चे को जन्म देने के लिए अपने घर परिवार समाज से लड़ती हुई उसको इस दुनिय का हिस्सा बनाती है | लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा बहुत
कम देखने को मिलता है हमारा समाज संस्कार रीती रीति रिवाजों पर चलता है इसके बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है | लेकिन आज समय बहुत तेजी से बदल रहा है
मुल्क की बागडोर नौजवान पीड़ी के हाथो में है | आज देश विकास की राह पर है हर जगह हमने कामियाबी के झंडे गाड़ दिए है चाहे वो विज्ञान प्रोदोयोगिकी हो या कला पूरे विश्व में हमारी एक
अलग पहचान बन गयी है | आज हम किसी भी विषेय पर बात करने से नहीं कतराते राजनीति , भूगोल , महगाई , गरीबी हर विषेय पर खुल कर बेखोफ बात करते है | जैसे ही हमारे कानो
में सेक्स शब्द सुनाई देता है तो हम उस पर बात करने से परहेज करते है | कुछ लोग तो हमारे देश में सेक्स के शाब्दिक अर्थ को भी नहीं जानते है इसको केवल कामोइछा से जोड़ कर देखते है |
जबकि हम अच्छी तरह से परिचित है की सेक्स हमारे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा है , इस समस्या को रोकने का सबसे बड़ा तरीका सेक्स एजुकेशन के माध्यम से बच्चो को जागरूक करना जरुरी
है|
लेकिन हमे अपनी सोच को थोडा सा इसके प्रति बदलने की जरुरत है ऐसे केसेस बढने का सबसे बड़ा कारण आज भी हमारे देश में सेक्स को टेबू समझना है | ऐसे में बच्चो के लिए सेक्स एक सस्पेंस लम्बे समय तक बना रहता है , आज हमारे दैनिक जीवन में फिल्म , अख़बार यहाँ तक कि रिअलिटी शो में
भी सेक्स खूब परोसा जा रहा है | अक्सर हम अपने बच्चो के सामने बात तो दूर बल्कि इस शब्द को भी सुनना पसंद नहीं करते है और ऐसा करके कही न कही हम अपने परेशानियों को ही आमंत्रित
करते है | हमे बच्चो को हर स्तर पर जागरूक बनाना चाहिए | इसके बारे में हम अपने बच्चो से खुल कर बात करे वरना इस तरह के केसेस दिन प्रतिदिन बड़ते जायेंगे |
अमित आद्वंशी
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