Tuesday, 20 December 2011


                                                 प्यार एक अपराध क्यों ?
 जब प्यार किया तो डरना क्या ........ जब प्यार किया तो फिल्म मुगले आज़म का ये गीत आज भी लोग अक्सर गुनगुनाते है | नौशाद साहब ने पूरी लग्न से इस 
 गीत को संगीतबद किया , वक़्त के साथ साथ गीत बदले तो हिंदी सिनेमा की आत्मा भी बदल गयी | लेकिन भारतीय समाज की सोच अभी नहीं बदली जिसके लिए 
 प्रेमी जोड़े न जाने कब से राह  देख रहे है | जिस देश में राम और सीता , कृष्ण और राधा की उपासना पूरी निष्ट एवं भक्ति भाव से होती है उसी देश में प्यार करने 
 वालो को मौत के घाट  उतार दिया जाता है न जाने क्यों हमारा  समाज ऐसे प्रेमी जोड़ो को स्वीकार नहीं करते जो एक दुसरे के साथ सात फेरो के बंधन मे बंधना चाहते है |
 मुगले आज़म ही नहीं बल्कि आज भी हमारे सामने इतने उदहारण है जिसने प्रेमी जोड़ियो को हमेशा के लिए एक दुसरे से जुदा किया |
 चाहे खाप पंचायत हो या अपने आप को कहने वाला सभ्य समाज दोनों के भीतर ही प्यार करने वालो के खिलाफ नफरत भरी है |
 जिस देश को आपसी भाईचारे प्रेम , एवं सदभावना के लिए पहचाना जाता है , उसी देश में दो प्यार करने वालो को सर छिपाने की 
 जगह भी नहीं मिलती है | घर,परिवार ,समाज उनका इतना बड़ा दुश्मन बन जाता है की मानो प्यार नहीं कोई उन्होंने कोई बहुत बड़ा अपराध 
 किया हो | बचपन से ही हमे सिखाया जाता है की सबसे प्यार से पेश आओ , आये दिन टी .वी ,अखबारों में बड़े बड़े संत महात्मा प्रेम पर व्याखान 
 देते हुए नज़र आते है | लेकिन जब ये प्यार उनकी गली मोहल्ले में परवान चड़ता है तो येही लोग उन्हें कोसना शुरू कर देते है | मैं पूछता हु की 
 आखिर कब तक समाज के ये ठेकेदार इन प्रेमी जोड़ो को जुदा करने का ये घिनोना काम करते रहेंगे | जब ये समाज प्यार का अर्थ ही नहीं जानता
  तो क्यों मंदिर में घंटी बजा बजा कर इश्वर के प्रति प्रेम का झूठा दिखावा करता है , आखिर कब तक हमारी पीड़ी अपने प्यार के लिए इस दिखावटी 
 समाज से लड़ती रहेगी | 
                                    
                                     देश की भारी चमक धमक के भीतर ही एक ऐसी सोच भी है जो कुंठित मानसिकता से पीड़ित है |
                                     ग़ालिब ने फ़रमाया था ये इश्क नहीं आसान बस इतना समाज लीजये, आग का दरिया है डूब के जाना 
 ग़ालिब की शायरी का वो दौर तो चला गया लेकिन प्रभाव जस का तस बना हुआ है | भारत आज विकास की उड़ान भर रहा है  लेकिन हमे 
 एक बार अपने भीतर उतर कर विचार करना पड़ेगा | समाज और इन्सान भी बड़ा अपनी सोच से बनता है न की अपनी झूटी शान से , प्रेम 
 परमात्मा की देंन है और इसी में ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सुख है      

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